उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध Mahakal Temple में सिंहस्थ 2028 को ध्यान में रखते हुए बड़ी तैयारियां शुरू हो गई हैं। मंदिर प्रशासन श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और दर्शन व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए कई आधुनिक बदलाव करने जा रहा है। अब भक्तों को केवल भस्म आरती ही नहीं, बल्कि सांध्य और शयन आरती की जानकारी और दर्शन का बेहतर अनुभव भी मिलेगा। इसके साथ ही भीड़ नियंत्रण के लिए हाईटेक QR आधारित बैरियर्स लगाए जाएंगे।
Mahakal Temple में लगेंगे QR आधारित बैरियर्स
महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति ने दर्शन व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित बनाने के लिए QR आधारित बैरियर्स लगाने का फैसला किया है। इन बैरियर्स की मदद से श्रद्धालुओं की आवाजाही को नियंत्रित किया जाएगा, जिससे लंबी कतारों और भीड़ की समस्या कम हो सकेगी। मंदिर प्रशासन का मानना है कि इससे दर्शन प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक आसान और सुरक्षित बनेगी।
सांध्य और शयन आरती पर रहेगा विशेष फोकस
अब तक देशभर से आने वाले अधिकांश श्रद्धालु केवल सुबह होने वाली भस्म आरती के बारे में ही जानते थे। मंदिर समिति अब सांध्य आरती और शयन आरती के महत्व को भी व्यापक रूप से प्रचारित करेगी। प्रशासन का उद्देश्य है कि श्रद्धालु इन विशेष आरतियों में भी शामिल होकर आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त कर सकें।
गर्मी से राहत के लिए बनेंगे नए शेड
महाकाल लोक में श्रद्धालुओं को धूप और गर्मी से राहत देने के लिए लगभग 11 करोड़ रुपये की लागत से फैब्रिकेशन शेड लगाए जाएंगे। फिलहाल मंदिर परिसर में फॉगिंग फव्वारों की व्यवस्था की गई है ताकि बढ़ते तापमान के बीच भक्तों को राहत मिल सके। गर्मी के मौसम में यहां हर दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।
सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण पर बढ़ेगा ध्यान
सिंहस्थ महापर्व 2028 को देखते हुए मंदिर परिसर में करीब 1000 नए बैरिकेड्स लगाने की मंजूरी दी गई है। इसके अलावा 80 नई स्टील दानपेटियां भी लगाई जाएंगी। मंदिर प्रशासन का कहना है कि आने वाले वर्षों में श्रद्धालुओं की संख्या तेजी से बढ़ेगी, इसलिए व्यवस्थाओं को आधुनिक और सुरक्षित बनाया जा रहा है।
ऑनलाइन सुविधाओं का भी होगा विस्तार
मंदिर समिति जल्द ही वेबसाइट पर अन्नक्षेत्र मॉड्यूल शुरू करने जा रही है, जिससे श्रद्धालुओं को कई सुविधाएं ऑनलाइन मिल सकेंगी। अधिकारियों के अनुसार वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए करीब 29974 लाख रुपये का बजट प्रस्ताव भी पारित किया गया है। इससे मंदिर की व्यवस्थाओं और सुविधाओं को और मजबूत किया जाएगा।
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