पेट्रोल डीजल हड़ताल को लेकर देशभर में गिग वर्कर्स और ऐप आधारित ड्राइवरों के बीच नाराजगी बढ़ती दिखाई दे रही है। बढ़ती ईंधन कीमतों और कम भुगतान दरों के विरोध में शनिवार को दोपहर 12 बजे से शाम 5 बजे तक अस्थायी राष्ट्रव्यापी बंद का आह्वान किया गया है। गिग एंड प्लेटफॉर्म सर्विस वर्कर्स यूनियन ने देशभर के कैब ड्राइवरों और डिलीवरी कर्मचारियों से इस विरोध प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की है।
पेट्रोल डीजल हड़ताल के पीछे बढ़ती लागत
गिग वर्कर्स का कहना है कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी के बावजूद ऐप कंपनियां किराए और भुगतान दरों में पर्याप्त वृद्धि नहीं कर रही हैं। इससे ड्राइवरों और डिलीवरी एजेंटों की कमाई पर सीधा असर पड़ रहा है। हाल ही में तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल के दामों में लगभग ₹3 प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है, जिसके बाद दिल्ली में पेट्रोल करीब ₹97.77 और डीजल ₹90.67 प्रति लीटर पहुंच गया है।
हैदराबाद जैसे शहरों में पेट्रोल की कीमत ₹110 प्रति लीटर के पार चली गई है, जबकि डीजल भी करीब ₹99 प्रति लीटर तक पहुंच गया है। ऐसे में पूरे दिन सड़क पर काम करने वाले गिग वर्कर्स के लिए खर्च निकालना मुश्किल होता जा रहा है।
ड्राइवरों ने बताई कमाई की परेशानी
ऐप आधारित कैब सेवाओं से जुड़े कई ड्राइवरों का कहना है कि ईंधन महंगा होने के बाद उनकी वास्तविक आय लगातार घट रही है। एक ड्राइवर ने बताया कि पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ने के बाद कमीशन और अन्य खर्च निकालने पर बहुत कम पैसा बचता है। कई बार घर का खर्च चलाना भी मुश्किल हो जाता है।
गिग वर्कर्स का आरोप है कि कंपनियां ग्राहकों से किराया तो वसूलती हैं, लेकिन ड्राइवरों को उसका उचित हिस्सा नहीं मिलता। यही वजह है कि अब कर्मचारी सामूहिक विरोध के जरिए अपनी आवाज उठाना चाहते हैं।
वैश्विक संकट से बढ़ी तेल कीमतें
विशेषज्ञों के अनुसार वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में रुकावट और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के कारण भारत में भी ईंधन महंगा हुआ है। कच्चे तेल की कीमत फरवरी में लगभग 69 डॉलर प्रति बैरल थी, जो अब 100 डॉलर से ऊपर पहुंच चुकी है। इसका असर सीधे घरेलू बाजार पर दिखाई दे रहा है।
तेल कंपनियों का कहना है कि लागत बढ़ने के बावजूद वे पूरी तरह नुकसान की भरपाई नहीं कर पा रही हैं। अनुमान है कि सरकारी तेल कंपनियों को पेट्रोल पर प्रति लीटर करीब ₹10 और डीजल पर ₹13 तक का नुकसान हो रहा है।
आम लोगों पर भी पड़ सकता है असर
गिग वर्कर्स की इस अस्थायी हड़ताल का असर शहरों में कैब और फूड डिलीवरी सेवाओं पर पड़ सकता है। यदि बड़ी संख्या में कर्मचारी सेवाएं बंद रखते हैं तो लोगों को यात्रा और ऑनलाइन ऑर्डर में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। वहीं विशेषज्ञों का मानना है कि ईंधन कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से आने वाले दिनों में महंगाई का दबाव और बढ़ सकता है।









